🎬 वीडियो में देखें — यह टेस्ट कैसे काम करता है
किसके लिए है यह टेस्ट इन पर लागू होता है
किसके लिए नहीं है यह टेस्ट इन पर लागू नहीं होता
स्कोर न देखें — तुरंत डॉक्टर/अस्पताल जाएँ।
यह टेस्ट बवासीर (Piles) की गंभीरता जाँचने के लिए है। सभी सवालों के जवाब दें और अपना स्कोर देखें। यह चिकित्सीय निदान नहीं है।
यह टेस्ट 0 से 20 तक स्कोर देता है। नीचे हर स्तर का मतलब सीधे शब्दों में लिखा है।
अच्छी बात ये है कि आपकी तकलीफ़ अभी शुरुआती दौर में लगती है।
हल्का खून या जलन, मस्सा बाहर नहीं आता, कभी-कभार तकलीफ़
फाइबर, पानी, सिट्ज़ बाथ — घर पर देखभाल। 1–2 हफ़्ते में आराम न हो तो सलाह लें।
आपकी तकलीफ़ ठीक-ठाक बढ़ी हुई लगती है — अभी ध्यान देने का समय है।
अक्सर खून, ज़ोर लगाने पर मस्सा बाहर आकर अंदर जाना, दर्द-खुजली
परहेज़ सख़्ती से अपनाएँ और योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
आपकी तकलीफ़ काफ़ी बढ़ी हुई लगती है — अब देर मत कीजिए, डॉक्टर से जल्दी मिलिए।
बार-बार/ज़्यादा खून, मस्सा हाथ से अंदर करना पड़े या हमेशा बाहर रहे, तेज़ दर्द
जल्दी योग्य चिकित्सक से मिलें — सही जाँच ज़रूरी है।
यह स्कोर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले Hemorrhoidal Disease Symptom Score (HDSS) से प्रेरित है, जो पाँच लक्षणों — दर्द, रक्तस्राव, खुजली, रिसाव और प्रोलैप्स — पर आधारित है। यह उसका हिंदी रूपांतरण है, जिसका अलग से वैज्ञानिक सत्यापन नहीं हुआ है। इसलिए यह चिकित्सीय निदान नहीं, केवल एक स्व-आकलन संकेतक है।
इस टेस्ट के पीछे 10 हवाले हैं। हर एक का लिंक साथ है — आप खुद खोलकर पढ़ सकते हैं।
इनमें से 10 हवाले PubMed पर दर्ज हैं — ऊपर दिए PMID से आप उन्हें सीधे खोज सकते हैं।
नीचे सिर्फ़ वही बातें हैं जो आप ख़ुद जाँच सकते हैं।
बवासीर एक आम स्थिति है जिसमें रोगी को सही जानकारी और समय पर सलाह से बहुत फर्क पड़ता है। मेरे 35+ सालों के अनुभव में देखा है कि जीवनशैली सुधार, पर्याप्त फाइबर और पानी के साथ होम्योपैथिक दवाएं 💧 शुरुआती और मध्यम स्थिति में लक्षणों में काफी आराम ला सकती हैं। लेकिन बवासीर का सही ग्रेड जानने और उपचार योजना तय करने के लिए योग्य चिकित्सक की जांच और सलाह आवश्यक है।
Dr. Satish Sharma, DHMS · Reg. No. 5454-A
Council of Homoeopathic System of Medicine, Haryana (Dept. of Ayush, Govt. of Haryana)
नवीनीकरण: 31 दिसंबर 2026 तक
इस पेज की समीक्षा और तथ्य-जाँच — दोनों Dr. Satish Sharma, DHMS ने की हैं।
यह पेज किन नियमों से बनता और जाँचा जाता है, वह पूरी नीति में लिखा है।
| बवासीर / Piles | फिशर / Fissure | फिस्टुला / Fistula | |
|---|---|---|---|
| यह क्या है What it is | गुदा/मलाशय की फूली हुई नसें (मस्से) | गुदा की त्वचा में छोटा कट/चीरा | गुदा के पास बनी सुरंग (फोड़े से) |
| दर्द Pain | अक्सर दर्द-रहित; दबाव/भारीपन। थक्का बने तो तेज़ दर्द | तेज़, ब्लेड जैसा दर्द — टट्टी के दौरान व बाद में (90% में दर्द) | लगातार बेचैनी; बैठने पर बढ़े |
| खून / स्राव Bleeding/Discharge | चमकीला लाल खून, मल के ऊपर | हल्का लाल खून, टिशू पर | मवाद/पस का रिसाव, खून कम |
| मुख्य कारण Main cause | कब्ज़, ज़ोर लगाना, देर बैठना | सख़्त मल, कब्ज़ से त्वचा फटना | गुदा ग्रंथि का संक्रमण/फोड़ा |
| गांठ/मस्सा Lump | हाँ, मस्सा बाहर आ सकता है | आमतौर पर नहीं (कभी skin tag) | गुदा के पास छेद/ओपनिंग |
| गंभीरता Severity | कम-मध्यम — ज़्यादातर बिना ऑपरेशन ठीक | मध्यम — नया अक्सर ठीक, पुराना ज़िद्दी | ज़्यादा — अपने आप बंद नहीं होता |
| इलाज Treatment | फाइबर, पानी, सिट्ज़ बाथ; ज़रूरत पर प्रक्रिया | फाइबर, सिट्ज़ बाथ, क्रीम; ज़िद्दी में प्रक्रिया | ज़्यादातर सर्जरी ज़रूरी |
इस टेस्ट से जुड़े 20 सवाल — जवाब देखने के लिए सवाल पर टैप करें।
सीधा जवाब: 🚽 पुरानी बवासीर मुख्य रूप से लंबे समय की कब्ज़, मल त्याग में बार-बार ज़ोर लगाने, और घंटों एक जगह बैठे रहने से होती है। फाइबर की कमी, कम पानी, मोटापा, गर्भावस्था और बढ़ती उम्र इसे और बढ़ाते हैं। 📊 अंतरराष्ट्रीय शोध (PLoS ONE, 2021) के अनुसार कब्ज़ बवासीर का सबसे बड़ा कारण है — कब्ज़ वाले लोगों में जोखिम लगभग 4 गुना (समायोजित ऑड्स अनुपात 4.32) ज़्यादा पाया गया। जब कब्ज़ की वजह से बार-बार ज़ोर लगाना पड़ता है, तो गुदा-मलाशय की नसों पर दबाव बढ़ता है और वे गुब्बारे की तरह फूल जाती हैं। ड्राइवर, ऑफिस वर्कर और भारी वज़न उठाने वालों में पुरानी बवासीर ज़्यादा देखी जाती है। मोटापा (BMI 25+) भी जोखिम बढ़ाता है।
सीधा जवाब: 📊 बवासीर के मस्से 4 ग्रेड में बँटे होते हैं। ग्रेड 1 में सिर्फ़ खून आता है, मस्सा बाहर नहीं आता। ग्रेड 2 में ज़ोर लगाने पर बाहर आकर अपने आप अंदर चला जाता है। ग्रेड 3 में हाथ से अंदर करना पड़ता है। ग्रेड 4 में मस्सा हमेशा बाहर ही रहता है। 🩺 यह वर्गीकरण डॉक्टरों के Goligher classification पर आधारित है, जो पूरी दुनिया में इस्तेमाल होता है। बादी बवासीर में सूजन-दर्द मुख्य होते हैं, जबकि खूनी बवासीर में दर्द कम पर खून ज़्यादा आता है। जैसे-जैसे ग्रेड बढ़ता है (1 से 4), इलाज उतना ही ज़रूरी हो जाता है। ग्रेड 4 की पुरानी बवासीर अपने आप ठीक नहीं होती और इसमें विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है। सही ग्रेड डॉक्टर की जाँच से ही पता चलता है।
सीधा जवाब: 💧 खूनी बवासीर में फूली हुई नसों पर मल की रगड़ से खून आता है, जो आमतौर पर चमकीला लाल होता है और मल के ऊपर या टॉयलेट पेपर पर दिखता है। थोड़ा खून आम है, पर बहुत ज़्यादा खून, चक्कर या मल में मिला खून सामान्य नहीं — तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। ⚠️ आंतरिक बवासीर में अक्सर दर्द-रहित खून आता है, यही इसकी सबसे आम पहचान है। मेडिकल शोध के अनुसार बवासीर से शायद ही कभी इतना खून जाता है कि खून की कमी (एनीमिया) हो जाए — इसलिए अगर लगातार बहुत खून जा रहा है या कमज़ोरी महसूस हो रही है, तो यह सिर्फ़ बवासीर नहीं, कुछ और भी हो सकता है। काला मल, मल में मिला खून, या 40 की उम्र के बाद पहली बार खून आना — ये जाँच कराने के संकेत हैं।
सीधा जवाब: 🥗 हाँ, ज़्यादातर बवासीर बिना ऑपरेशन ठीक हो जाती है। शुरुआती और मध्यम बवासीर में फाइबर बढ़ाना, खूब पानी पीना, ज़ोर न लगाना और गुनगुने पानी का सिट्ज़ बाथ सबसे असरदार है। ऑपरेशन सिर्फ़ बहुत बढ़ी हुई (ग्रेड 4) या जटिल बवासीर में लगता है। 📊 दुनियाभर के दिशा-निर्देश (ASCRS) भी यही कहते हैं — सबसे पहले खान-पान और रहन-सहन सुधारें, यही प्राथमिक इलाज है। एक मेटा-विश्लेषण (PMID 16405552) के अनुसार फाइबर लेने से बवासीर का खून लगभग 50% (सापेक्ष जोखिम 0.50) तक कम हो जाता है। इसलिए बिना ऑपरेशन इलाज की शुरुआत हमेशा जीवनशैली सुधार से होती है। होम्योपैथी, आयुर्वेद और एलोपैथी तीनों में बवासीर के लक्षणों के लिए बिना सर्जरी विकल्प मौजूद हैं। सही इलाज आपकी हालत देखकर डॉक्टर ही तय करते हैं।
सीधा जवाब: 🩺 तीनों अलग हैं। बवासीर में गुदा की नसें सूज जाती हैं (मस्सा, खून)। फिशर में गुदा की त्वचा में छोटा कट/चीरा पड़ता है, जिससे मल त्याग पर तेज़ जलन-दर्द होता है। फिस्टुला (भगंदर) एक सुरंग जैसी होती है जो संक्रमण से बनती है, जिसमें बार-बार मवाद आता है। 📊 आसान पहचान — बवासीर = सूजी नस, खून ज़्यादा दर्द कम। फिशर = कट जाने जैसी तेज़ जलन, ख़ासकर टट्टी के बाद, अक्सर कब्ज़ से। फिस्टुला = बार-बार मवाद वाली सुरंग, जो आमतौर पर पहले फोड़े से बनती है। चूँकि तीनों के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं और कभी एक साथ भी होते हैं, सही पहचान के लिए डॉक्टर की जाँच (जैसे प्रॉक्टोस्कोपी) ज़रूरी है। दुनिया की लगभग 26% आबादी कभी न कभी बवासीर से प्रभावित होती है, जबकि फिशर-फिस्टुला कम आम हैं।
सीधा जवाब: 🩺 फिशर गुदा की त्वचा में आया छोटा कट है, जो ज़्यादातर सख़्त मल और कब्ज़ से होता है। इसमें टट्टी के समय ब्लेड जैसी तेज़ जलन और हल्का खून आता है। नया फिशर अक्सर 3-6 हफ़्ते में फाइबर और सिट्ज़ बाथ से ठीक हो जाता है। पुराना फिशर ज़्यादा समय लेता है। 🥗 शोध के अनुसार लगभग आधे (50%) लोगों का फिशर बिना ऑपरेशन वाले इलाज — रेशा, सिट्ज़ बाथ और दवा — से ही ठीक हो जाता है (PMID 26929749)। फाइबर जारी रखने से दोबारा होने से बचाव होता है। सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) से फिशर लगभग 80% लोगों में ठीक हो जाता है (PMID 36337820)। बाक़ी लोगों को दवा या प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ सकती है। फिशर का दुष्चक्र (दर्द → सिकुड़न → खून की कमी → देर से भरना) तोड़ने के लिए कब्ज़ दूर करना सबसे ज़रूरी है।
सीधा जवाब: ⚠️ फिस्टुला (भगंदर) ज़्यादातर गुदा के पास बने फोड़े के ठीक से न भरने पर बनता है — यह एक सुरंग बन जाती है जिससे बार-बार मवाद रिसता है। बवासीर-फिशर के उलट, फिस्टुला आमतौर पर सिर्फ़ दवा या परहेज़ से ठीक नहीं होता और ज़्यादातर मामलों में सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। 🩺 मेडिकल शोध (नेटवर्क मेटा-विश्लेषण, 20 अध्ययन, 1663 मरीज़) के अनुसार फिस्टुला का असली इलाज सर्जरी ही माना जाता है, क्योंकि सुरंग अपने आप बंद नहीं होती। यह आमतौर पर 20-40 साल के नौजवानों में ज़्यादा, और पुरुषों में महिलाओं से लगभग 2 गुना ज़्यादा देखा जाता है। अगर फिस्टुला, बार-बार फोड़े या असामान्य स्किन टैग हों, तो डॉक्टर Crohn's disease जैसी आंत की बीमारी की भी जाँच करते हैं। इसलिए भगंदर को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं — समय पर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।
सीधा जवाब: 🥗 बवासीर में सबसे ज़रूरी है रेशे (फाइबर) वाला खाना — हरी सब्ज़ी, सलाद, फल, दाल, छिलके वाला अनाज और ईसबगोल। दिन में 8-10 गिलास पानी पिएँ। परहेज़ उसी चीज़ का करें जो आपकी तकलीफ़ बढ़ाए — बहुत तीखा, ज़्यादा तला या ज़्यादा चाय-कॉफ़ी। 📊 एक मेटा-विश्लेषण (PMID 16405552) के अनुसार फाइबर लेने से बवासीर का खून लगभग 50% (सापेक्ष जोखिम 0.50) और लक्षण लगभग 47% (सापेक्ष जोखिम 0.53) तक कम हो जाते हैं — इसीलिए ASCRS भी फाइबर को पहला इलाज मानता है। डॉक्टर महिलाओं के लिए कम-से-कम 28 ग्राम और पुरुषों के लिए 38 ग्राम रोज़ फाइबर सुझाते हैं। ईसबगोल पर्याप्त पानी के साथ लें, पर शुगर, प्रेग्नेंसी या कोई पुरानी बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें। खट्टे फलों के फ्लेवोनॉइड भी खून-दर्द कम करने में मददगार बताए गए हैं।
सीधा जवाब: 🚽 बवासीर से बचाव के लिए डॉक्टर TONE नियम सुझाते हैं — • T: टॉयलेट में 3 मिनट से ज़्यादा न बैठें • O: दिन में एक बार नियमित शौच • N: ज़ोर न लगाएँ • E: भरपूर फाइबर लें। साथ ही रोज़ टहलें, खूब पानी पिएँ और लंबे समय एक जगह बैठने से बचें। 🥗 TONE रणनीति का मक़सद है मल त्याग के समय गुदा की नसों पर दबाव कम करना। टॉयलेट में फ़ोन ले जाकर देर तक बैठना सबसे आम गलती है — इससे नसों पर दबाव बढ़ता है। नियमित हल्की एक्सरसाइज़ पेट साफ़ रखती है और रक्त संचार सुधारती है। अच्छी नींद, धूम्रपान छोड़ना और तनाव कम करना भी बवासीर, फिशर और फिस्टुला तीनों का जोखिम घटाता है। यानी थोड़ी आदतें बदलकर इन तकलीफ़ों से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है।
सीधा जवाब: 🩺 हल्की और शुरुआती बवासीर अक्सर खान-पान व जीवनशैली सुधारने से अपने आप ठीक हो जाती है — जैसे फाइबर बढ़ाना, पानी पीना, ज़ोर न लगाना। लेकिन पुरानी, बड़ी (ग्रेड 3-4) या बार-बार खून वाली बवासीर अपने आप ठीक नहीं होती और इसे सही इलाज व डॉक्टर की सलाह की ज़रूरत होती है। ⚠️ शुरुआती दौर में जब सिर्फ़ हल्का खून या जलन होती है, तब जीवनशैली सुधार से बहुत फ़र्क़ पड़ता है। पर जैसे-जैसे मस्सा बड़ा होकर बाहर निकलने लगता है, घरेलू उपाय कम पड़ने लगते हैं। बाहरी बवासीर में अगर खून का थक्का बन जाए तो तेज़ दर्द होता है, जो कुछ दिन में कम होता है पर सूजन जाने में हफ़्ते लग सकते हैं। इसलिए दिक़्क़त टालें नहीं — जितनी जल्दी ध्यान देंगे, इलाज उतना आसान रहेगा।
सीधा जवाब: ⚠️ अगर बहुत ज़्यादा खून आ रहा हो, चक्कर/कमज़ोरी लगे, मल काला आए, मल में मिला खून दिखे, बिना वजह वज़न घटे, या 40 की उम्र के बाद पहली बार खून आए — तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। घरेलू उपायों से 1-2 हफ़्ते में आराम न मिले तो भी जाँच ज़रूरी है। 🩺 ये चेतावनी संकेत इसलिए ज़रूरी हैं क्योंकि गुदा से आने वाला हर खून बवासीर का नहीं होता — कभी यह आंत के कैंसर, IBD (Crohn's/अल्सरेटिव कोलाइटिस) या दूसरी गंभीर बीमारियों का भी संकेत हो सकता है। परिवार में आंत के कैंसर का इतिहास, खून पतला करने की दवा (एस्पिरिन/वारफ़ेरिन), या लगातार मल त्याग की आदत बदलना — इन स्थितियों में डॉक्टर प्रॉक्टोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं। इन संकेतों को कभी हल्के में न लें।
सीधा जवाब: ⚠️ ज़्यादातर मामलों में बवासीर खतरनाक नहीं होती और सही देखभाल से ठीक हो जाती है। बवासीर खुद कैंसर नहीं बनती। पर इसके जैसे लक्षण (ख़ासकर खून) कभी आंत के कैंसर जैसे भी हो सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं — एक बार जाँच करा लेना समझदारी है। 📊 बवासीर एक सौम्य स्थिति है — यह कैंसर नहीं है और न कैंसर में बदलती है। पर समस्या यह है कि बवासीर और आंत के कैंसर के शुरुआती लक्षण (खून आना) मिलते-जुलते होते हैं। इसीलिए डॉक्टर 'सिर्फ़ बवासीर है' मानकर बैठने से मना करते हैं, ख़ासकर अधिक उम्र या पारिवारिक इतिहास वालों में। लगातार खून से कभी खून की कमी (एनीमिया) हो सकती है। आँकड़े बताते हैं कि 50 की उम्र तक लगभग आधे (50%) लोगों को कभी न कभी बवासीर होती है, फिर भी 40 के बाद नई शुरू हुई ब्लीडिंग में डॉक्टर जाँच की सलाह देते हैं।
सीधा जवाब: 🩺 बहुत पुरानी बवासीर भी कई बार जीवनशैली सुधार, फाइबर और सही इलाज से नियंत्रित हो सकती है, ख़ासकर अगर ग्रेड ज़्यादा बढ़ा न हो। पर जो बवासीर सालों से ग्रेड 3-4 पर है और हमेशा बाहर रहती है, उसमें अक्सर प्रक्रिया या सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। 🥗 पुरानी बवासीर में सबसे पहले डॉक्टर लक्षण और ग्रेड की जाँच करते हैं — कितने समय से है, कितना खून आता है, मस्सा कितना बाहर आता है। इसके आधार पर इलाज तय होता है। महत्वपूर्ण बात — सालों पुरानी बवासीर का मतलब यह नहीं कि सीधे ऑपरेशन ही एकमात्र रास्ता है; कई मरीज़ों में नियमित परहेज़, फाइबर और दवा से अच्छा नियंत्रण मिल जाता है। पर लंबे समय की दिक़्क़त को बिना जाँच के टालना ठीक नहीं — इसलिए विशेषज्ञ से एक बार सही आकलन ज़रूर कराएँ।
सीधा जवाब: ♨️ सिट्ज़ बाथ यानी गुनगुने पानी के टब में पिछले हिस्से को डुबोकर 10-15 मिनट बैठना, दिन में 1-2 बार, ख़ासकर टट्टी के बाद। यह गुदा की मांसपेशियों को ढीला करता है, दर्द-जलन कम करता है और सूजन घटाता है। 📊 शोध के अनुसार सिट्ज़ बाथ से फिशर लगभग 80% लोगों में ठीक हो जाता है (PMID 36337820)। गुनगुना पानी रक्त संचार बढ़ाता है, जिससे ऊतकों की मरम्मत तेज़ होती है और मांसपेशियों की ऐंठन कम होती है। यह बवासीर और फिशर दोनों में सबसे आसान, सस्ता और असरदार घरेलू उपाय है। ध्यान दें — पानी सिर्फ़ गुनगुना हो (बहुत गर्म नहीं), और बाद में हिस्से को धीरे से सुखा लें। दिन में 2-3 बार करने से ज़्यादा फ़ायदा मिलता है।
सीधा जवाब: 🥗 ईसबगोल मल को नरम और भारी बनाकर कब्ज़ दूर करता है, जिससे ज़ोर नहीं लगाना पड़ता — यह बवासीर में बहुत मददगार है। आमतौर पर 1-2 चम्मच रात को एक भरे गिलास गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जाता है। ज़रूरी है कि साथ में भरपूर पानी पिएँ। 💧 ईसबगोल एक घुलनशील फाइबर है जो आँतों में पानी सोखकर मल को मुलायम बनाता है। मेडिकल शोध में ईसबगोल को बवासीर के खून और लक्षण कम करने में असरदार पाया गया है। पर इसे हमेशा पर्याप्त पानी के साथ लें, वरना यह उल्टा कब्ज़ बढ़ा सकता है। अगर शुगर, प्रेग्नेंसी, निगलने में दिक़्क़त, या कोई दवा चल रही हो — तो पहले डॉक्टर से पूछ लें। शुरुआत कम मात्रा से करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
सीधा जवाब: 🚽 हाँ, घंटों एक जगह बैठे रहना और टॉयलेट में मोबाइल लेकर देर तक बैठना बवासीर के बड़े कारणों में हैं। 📱 लंबे समय बैठने से गुदा की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, और टॉयलेट में देर तक ज़ोर लगाने से ये नसें फूल जाती हैं। जब हम टॉयलेट सीट पर बैठते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण और सीट के आकार की वजह से गुदा क्षेत्र पर पहले से दबाव होता है। मोबाइल चलाते हुए 10-15 मिनट बैठे रहना इस दबाव को और बढ़ाता है। ड्राइवर, IT/ऑफिस वर्कर और लंबी ड्यूटी वालों में इसीलिए बवासीर ज़्यादा देखी जाती है। बचाव — टॉयलेट में फ़ोन न ले जाएँ, 3 मिनट में काम पूरा करें, और काम के बीच हर घंटे थोड़ा उठकर टहलें।
सीधा जवाब: 🤰 हाँ, गर्भावस्था में बवासीर आम है। बढ़ते गर्भाशय का नसों पर दबाव, हार्मोन बदलाव से कब्ज़, और प्रसव के समय ज़ोर लगाना — ये सब बवासीर बढ़ाते हैं। ज़्यादातर मामलों में यह प्रसव के बाद सुरक्षित देखभाल से अपने आप ठीक हो जाती है। 🩺 गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन आँतों की गति धीमी कर देता है, जिससे कब्ज़ होती है — और कब्ज़ बवासीर का सबसे बड़ा कारण है। तीसरी तिमाही में बढ़ा हुआ गर्भाशय पेल्विक नसों पर सीधा दबाव डालता है। बचाव और राहत के लिए — फाइबर युक्त खाना, खूब पानी, हल्की सैर और सिट्ज़ बाथ सुरक्षित हैं। कोई भी दवा गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। ज़्यादातर महिलाओं में यह डिलीवरी के कुछ हफ़्तों बाद ठीक हो जाती है।
सीधा जवाब: 📊 बवासीर बहुत आम है। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार दुनिया की लगभग 26% आबादी किसी न किसी समय बवासीर से प्रभावित होती है — यानी हर 4 में से लगभग 1 व्यक्ति। 50 की उम्र तक तो आधे से ज़्यादा लोगों को कभी न कभी बवासीर होती है। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण (Annals of Medicine, 2025; 150 अध्ययन, ~90 लाख लोग) में बवासीर की वैश्विक व्यापकता 25.92% पाई गई। यानी यह दुनिया की सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसके बावजूद बहुत से लोग शर्म की वजह से इलाज टाल देते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। यह आँकड़ा बताता है कि बवासीर में शर्माने या छुपाने जैसी कोई बात नहीं — यह एक आम, समझी-बूझी और इलाज-योग्य स्थिति है।
सीधा जवाब: 📝 यह एक मुफ़्त ऑनलाइन सेल्फ-टेस्ट है, जिसमें आप अपने लक्षणों (खून, मस्सा, दर्द, खुजली, मल का प्रकार) के सवालों के जवाब देते हैं। 2-3 मिनट में यह बता देता है कि आपकी तकलीफ़ शुरुआती, मध्यम या ज़्यादा बढ़ी हुई लगती है, और आगे क्या करना ठीक रहेगा। 🩺 यह टेस्ट डॉक्टरों के दुनियाभर में माने हुए तरीक़ों — HDSS (Hemorrhoidal Disease Symptom Score), Goligher classification और Bristol Stool Scale — पर बनाया गया है। यह आपके बताए लक्षणों को एक स्कोर (0-20) में बदलकर हालत का अंदाज़ा देता है, साथ ही खतरनाक संकेतों (red flags) की भी जाँच करता है। ध्यान दें — यह जागरूकता का उपकरण है, डॉक्टर की जाँच या निदान का विकल्प नहीं। पक्की पहचान सिर्फ़ डॉक्टर की जाँच से होती है।
सीधा जवाब: 📞 बवासीर, खूनी बवासीर, मस्से, फिशर या फिस्टुला (भगंदर) से जुड़ी सलाह के लिए आप Teqtis India (हिसार) से संपर्क कर सकते हैं — कॉल करें 70422-47248 या 82857-42000, या वेबसाइट teqtis.in पर जाएँ। ध्यान रहे, यह सलाह डॉक्टर की जाँच की जगह नहीं है। 🩺 Teqtis India के ब्रांड चिकित्सक डॉ. सतीश शर्मा (DHMS, Reg. 5454-A) को होम्योपैथी में 35+ वर्षों का अनुभव है, और बवासीर, फिशर व फिस्टुला के होम्योपैथिक उपचार में विशेषज्ञता है। आप फ़ोन पर अपनी स्थिति बता सकते हैं और सामान्य मार्गदर्शन ले सकते हैं। गंभीर लक्षण (बहुत खून, तेज़ दर्द, बुखार) हों तो सबसे पहले नज़दीकी डॉक्टर या अस्पताल ज़रूर जाएँ।
नीचे दिए लक्षणों में स्कोर देखने में समय न लगाएँ।
यह टूल किसी बीमारी का निदान नहीं करता। आपात स्थिति में नज़दीकी अस्पताल जाएँ।
चिकित्सक-समीक्षित · शोध-आधारित मार्गदर्शिका
बवासीर (Piles / Hemorrhoids) गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों के फूल जाने की स्थिति है। इसमें मल त्याग के समय खून आना, दर्द, खुजली, रिसाव या मस्से का बाहर आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यह बवासीर सेल्फ-टेस्ट कैलकुलेटर आपके इन्हीं लक्षणों को कुछ आसान सवालों के ज़रिए एक स्कोर में बदल देता है, ताकि आप समझ सकें कि स्थिति हल्की है, मध्यम है या बढ़ी हुई — और चिकित्सक से मिलने से पहले अपनी बात साफ़ ढंग से रख सकें। नीचे इसी पन्ने पर लक्षण, कारण, चारों ग्रेड का मतलब, घरेलू देखभाल, और वे चेतावनी लक्षण भी मिलेंगे जिनमें तुरंत चिकित्सक को दिखाना ज़रूरी है। ध्यान रहे — यह टेस्ट चिकित्सीय निदान नहीं है, केवल एक स्व-आकलन संकेतक; किसी भी इलाज का फ़ैसला योग्य चिकित्सक ही करेंगे।
बवासीर (अंग्रेज़ी में Hemorrhoids या पाइल्स) गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों के फूल जाने की स्थिति है। जब इन नसों पर बार-बार दबाव पड़ता है, तो वे गुब्बारे की तरह फूलकर मस्से बना देती हैं — इन्हें ही आम भाषा में बवासीर के मस्से या अर्श कहते हैं। यह कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है; एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन (Annals of Medicine, 2025; 150 अध्ययन, लगभग 90 लाख लोग) में बवासीर की वैश्विक व्यापकता लगभग 25.92% पाई गई — यानी दुनिया में हर चार में से लगभग एक व्यक्ति कभी न कभी इससे प्रभावित होता है। इसलिए बवासीर में शर्माने या छुपाने जैसी कोई बात नहीं — यह एक आम और इलाज-योग्य स्थिति है।
बवासीर दो तरह की होती है — आंतरिक जो गुदा के अंदर होती है और अक्सर दर्द-रहित खून लाती है, और बाहरी जो गुदा के बाहरी किनारे पर होती है और उसमें दर्द, सूजन व खुजली ज़्यादा होती है। बहुत से लोग “बादी बवासीर” और “खूनी बवासीर” शब्द भी सुनते हैं — बादी बवासीर में सूजन और दर्द मुख्य होते हैं, जबकि खूनी बवासीर में दर्द कम पर खून ज़्यादा आता है।
बवासीर के लक्षण हर व्यक्ति में थोड़े अलग हो सकते हैं, पर सबसे आम संकेत ये हैं:
अगर आप इन बवासीर के लक्षण को कुछ समय से महसूस कर रहे हैं, तो ऊपर दिया गया सेल्फ-टेस्ट आपके लक्षणों को एक स्कोर में बदलकर बता देता है कि स्थिति शुरुआती है, मध्यम है या ज़्यादा बढ़ी हुई।
बवासीर मुख्य रूप से तब होती है जब गुदा-मलाशय की नसों पर लंबे समय तक दबाव पड़ता है। सबसे बड़ा कारण है पुरानी कब्ज़ और मल त्याग में बार-बार ज़ोर लगाना। अंतरराष्ट्रीय शोध (PLoS ONE, 2021) के अनुसार कब्ज़ वाले लोगों में बवासीर का जोखिम लगभग 4 गुना (समायोजित ऑड्स अनुपात 4.32) ज़्यादा पाया गया। जब कब्ज़ की वजह से बार-बार ज़ोर लगाना पड़ता है, तो नसें फूल जाती हैं और पाइल्स बन जाती है।
अन्य प्रमुख कारण और जोखिम बढ़ाने वाले कारक:
डॉक्टर बवासीर के मस्से को उनकी गंभीरता के अनुसार चार ग्रेड में बाँटते हैं। यह वर्गीकरण दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले Goligher classification पर आधारित है:
जैसे-जैसे ग्रेड 1 से 4 की ओर बढ़ता है, इलाज की ज़रूरत उतनी ही बढ़ जाती है। Grade 4 की पुरानी पाइल्स आमतौर पर अपने आप ठीक नहीं होती और इसमें विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है। सही ग्रेड डॉक्टर की जांच से ही पक्का पता चलता है, पर इस सेल्फ-टेस्ट से आपको शुरुआती अंदाज़ा मिल जाता है।
खूनी बवासीर में फूली हुई नसों पर सख़्त मल की रगड़ से खून निकलता है। यह खून आमतौर पर चमकीला लाल होता है और दर्द-रहित हो सकता है — यही आंतरिक बवासीर की सबसे आम पहचान है। थोड़ा-बहुत खून आना आम बात है, पर कुछ संकेत सामान्य नहीं माने जाते और तुरंत जांच मांगते हैं:
मेडिकल शोध के अनुसार बवासीर से शायद ही कभी इतना खून जाता है कि खून की कमी (एनीमिया) हो जाए — इसलिए अगर लगातार बहुत खून जा रहा है या कमज़ोरी है, तो यह सिर्फ़ खूनी बवासीर नहीं, कुछ और भी हो सकता है। ऐसे में देर न करें।
कई लोग बवासीर, फिशर और फिस्टुला को एक ही समझ लेते हैं, जबकि तीनों अलग हैं:
नया फिशर अक्सर 3-6 हफ़्ते में फाइबर और सिट्ज़ बाथ से ठीक हो जाता है; शोध के अनुसार लगभग आधे (50%) लोगों का फिशर बिना ऑपरेशन वाले इलाज — रेशा, सिट्ज़ बाथ और दवा — से ही ठीक हो जाता है (PMID 26929749)। वहीं फिस्टुला आमतौर पर सिर्फ़ दवा से ठीक नहीं होता — एक नेटवर्क मेटा-विश्लेषण (20 अध्ययन, 1663 मरीज़) के अनुसार इसका असली इलाज प्रायः सर्जरी ही मानी जाती है। चूँकि तीनों के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, सही पहचान के लिए डॉक्टर की जांच (जैसे प्रॉक्टोस्कोपी) ज़रूरी है।
अच्छी ख़बर यह है कि ज़्यादातर मामलों में बवासीर का इलाज बिना ऑपरेशन संभव है। दुनियाभर के दिशा-निर्देश (ASCRS) भी यही कहते हैं — सबसे पहले खानपान और रहन-सहन सुधारना ही प्राथमिक इलाज है। एक मेटा-विश्लेषण (PMID 16405552) के अनुसार फाइबर लेने से बवासीर का खून लगभग 50% (सापेक्ष जोखिम 0.50) तक कम हो जाता है, और लक्षण लगभग 47% (सापेक्ष जोखिम 0.53) तक घट जाते हैं।
इसलिए बवासीर का इलाज हमेशा जीवनशैली सुधार से शुरू होता है: फाइबर बढ़ाना, खूब पानी पीना, ज़ोर न लगाना और गुनगुने पानी का सिट्ज़ बाथ। होम्योपैथी, आयुर्वेद और एलोपैथी — तीनों में बवासीर के लक्षणों के लिए बिना सर्जरी विकल्प मौजूद हैं। ऑपरेशन की ज़रूरत आमतौर पर सिर्फ़ बहुत बढ़ी हुई (Grade 4) या जटिल पाइल्स में पड़ती है। सही इलाज आपकी हालत देखकर डॉक्टर ही तय करते हैं — इसीलिए सालों पुरानी बवासीर का इलाज भी अक्सर नियंत्रण में लाया जा सकता है।
शुरुआती और मध्यम स्थिति में बवासीर के घरेलू उपाय बहुत असरदार होते हैं। सबसे ज़रूरी है रेशे (फाइबर) वाला खाना और भरपूर पानी:
परहेज़ उन्हीं चीज़ों का करें जो आपकी तकलीफ़ बढ़ाएँ — बहुत तीखा, ज़्यादा तला हुआ या बहुत चाय-कॉफ़ी। ये बवासीर के घरेलू उपाय आसान, सस्ते और सुरक्षित हैं, पर शुगर, प्रेग्नेंसी या कोई पुरानी बीमारी हो तो ईसबगोल या कोई दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
डॉक्टर बवासीर से बचाव के लिए एक आसान TONE नियम सुझाते हैं:
साथ ही रोज़ हल्की एक्सरसाइज़ या सैर, अच्छी नींद, धूम्रपान छोड़ना और तनाव कम करना — ये सब बवासीर, फिशर और फिस्टुला तीनों का जोखिम घटाते हैं। यानी थोड़ी आदतें बदलकर इन तकलीफ़ों से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है।
इन चेतावनी संकेतों में देर न करें और जल्द डॉक्टर से मिलें:
याद रखें — गुदा से आने वाला हर खून बवासीर का नहीं होता; कभी यह आंत के कैंसर या IBD जैसी स्थितियों का भी संकेत हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को कभी हल्के में न लें। ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रॉक्टोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं।
यह सेल्फ-टेस्ट Teqtis Health का बनाया हुआ है। इसे भरने के लिए न कोई फ़ॉर्म चाहिए, न रजिस्ट्रेशन।
यह मुफ़्त ऑनलाइन सेल्फ-टेस्ट डॉक्टरों के दुनियाभर में माने हुए तरीक़ों — HDSS (Hemorrhoidal Disease Symptom Score), Goligher classification और Bristol Stool Scale — पर बनाया गया है। आप अपने लक्षणों (खून, मस्सा, दर्द, खुजली, मल का प्रकार) के सवालों के जवाब देते हैं, और 2-3 मिनट में यह आपके जवाबों को एक स्कोर (0-20) में बदलकर बता देता है कि स्थिति शुरुआती, मध्यम या ज़्यादा बढ़ी हुई लगती है। साथ ही यह खतरनाक संकेतों (red flags) की भी जांच करता है।
ध्यान दें — यह जागरूकता का उपकरण है, डॉक्टर की जांच या निदान का विकल्प नहीं। पक्की पहचान सिर्फ़ डॉक्टर की जांच से होती है। और जानकारी के लिए हमारे हेल्थ कैलकुलेटर देखें, अनुभवी होम्योपैथिक मार्गदर्शन के लिए हमारे डॉक्टर से मिलें, या बवासीर से जुड़ी दवाएँ पढ़ें। चिकित्सीय संदर्भ के लिए विश्वसनीय स्रोत: NCBI — Anorectal Conditions Review और PubMed।
गर्भावस्था में पाइल्स होना बहुत आम है। बढ़ते गर्भाशय का पेल्विक नसों पर सीधा दबाव, हार्मोन के कारण आँतों की धीमी गति से होने वाली कब्ज़, और प्रसव के समय ज़ोर लगाना — ये सब मिलकर मस्से बना देते हैं। तीसरी तिमाही में यह तकलीफ़ ज़्यादा महसूस होती है। अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर महिलाओं में यह समस्या डिलीवरी के कुछ हफ़्तों बाद सुरक्षित देखभाल से अपने आप ठीक हो जाती है।
गर्भावस्था में राहत के लिए फाइबर युक्त खाना, खूब पानी, हल्की सैर और गुनगुने पानी का सिट्ज़ बाथ सुरक्षित माने जाते हैं। पर कोई भी दवा, क्रीम या ईसबगोल लेने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें — गर्भावस्था में स्व-चिकित्सा से बचना चाहिए। हल्की एक्सरसाइज़ पेट साफ़ रखती है और रक्त संचार सुधारती है, जिससे अर्श की तकलीफ़ कम रहती है।
बवासीर के मस्से अक्सर हमारी रोज़मर्रा की आदतों से बढ़ते हैं। घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, टॉयलेट में मोबाइल लेकर देर तक बैठना, पानी कम पीना और रेशे-रहित खाना — ये सब मिलकर मलद्वार की नसों पर लगातार दबाव डालते हैं। जब हम टॉयलेट सीट पर बैठते हैं तो गुरुत्वाकर्षण और सीट के आकार की वजह से उस क्षेत्र पर पहले से दबाव होता है; ऊपर से 10-15 मिनट बैठकर ज़ोर लगाना इस दबाव को और बढ़ा देता है, जिससे अर्श के मस्से उभरने लगते हैं।
इसीलिए ड्राइवर, IT और ऑफिस वर्कर, तथा लंबी ड्यूटी वाले लोगों में यह समस्या ज़्यादा देखी जाती है। बचाव आसान है — काम के बीच हर घंटे थोड़ा उठकर टहलें, टॉयलेट का काम 3 मिनट में पूरा करें, और रोज़ कुछ देर पैदल चलें। थोड़ी-सी सक्रियता बवासीर के मस्से को बढ़ने से रोकने में बड़ा फ़र्क़ डालती है। नियमित दिनचर्या, अच्छी नींद और तनाव कम रखना भी ऊतकों की सेहत के लिए ज़रूरी है।
इस रोग को लेकर कई ग़लतफ़हमियाँ हैं, जिन्हें दूर करना ज़रूरी है:
शर्म या झिझक की वजह से इलाज टालना सबसे बड़ी ग़लती है — जल्दी ध्यान देने पर यह रोग आसानी से नियंत्रण में आ जाता है।
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इस तकलीफ़ में रोज़ की कुछ छोटी आदतें बड़ी राहत देती हैं। मल त्याग की इच्छा होते ही जाएँ, उसे रोकें नहीं — रोकने से मल सख़्त होता है और दिक़्क़त बढ़ती है। शौच के बाद उस हिस्से को साफ़ पानी से धीरे से धोकर सुखाएँ; ज़्यादा रगड़ने या खुरदरे टॉयलेट पेपर से बचें, क्योंकि इससे जलन और बढ़ सकती है। ढीले, सूती कपड़े पहनें ताकि उस क्षेत्र में हवा लगे और नमी न जमे।
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने या खड़े रहने से बचें; बीच-बीच में थोड़ा टहलना रक्त संचार बनाए रखता है। अगर काम ही बैठकर करना पड़ता हो, तो नरम कुशन का इस्तेमाल करें और हर घंटे कुछ मिनट उठें। भारी वज़न उठाते समय साँस रोककर ज़ोर लगाने की आदत छोड़ें — यह नसों पर अचानक दबाव डालती है। रात को भरपूर नींद लें और तनाव कम रखें, क्योंकि नींद और मानसिक तनाव का सीधा असर पाचन और आँतों की गति पर पड़ता है।
खानपान में धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाएँ, एकदम से नहीं — वरना गैस और पेट फूलना बढ़ सकता है। हर रोज़ एक ही समय पर हल्का-सा गुनगुना पानी या नींबू-पानी पीने से सुबह पेट साफ़ होने में मदद मिलती है। शराब और बहुत ज़्यादा चाय-कॉफ़ी शरीर में पानी की कमी कर सकती है, इसलिए इन्हें सीमित रखें। ये आसान सावधानियाँ न सिर्फ़ मौजूदा तकलीफ़ कम करती हैं, बल्कि भविष्य में इसे दोबारा होने से भी रोकती हैं। नियमितता ही इसका असली इलाज है — कुछ हफ़्तों तक इन आदतों को अपनाएँ और फ़र्क़ ख़ुद महसूस करें।
बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि सुधार कब दिखने लगेगा। आमतौर पर जब आप फाइबर, पर्याप्त पानी और सही आदतें नियमित रूप से अपनाते हैं, तो हल्के मामलों में कुछ ही दिनों में जलन और खून आने में कमी महसूस होने लगती है। मल का नरम होना और शौच में कम ज़ोर लगाना — यही पहला सकारात्मक संकेत है। मध्यम स्थिति में पूरी राहत मिलने में आमतौर पर दो से चार हफ़्ते लग सकते हैं, क्योंकि फूली नसों और ऊतकों को सामान्य होने में समय चाहिए। बाहरी मस्से में अगर खून का थक्का बना हो, तो तेज़ दर्द कुछ दिनों में कम होता है, पर सूजन पूरी तरह जाने में हफ़्ते लग सकते हैं।
सबसे ज़रूरी बात — लक्षण कम होते ही अच्छी आदतें न छोड़ें, वरना तकलीफ़ दोबारा लौट सकती है। फाइबर, पानी और हल्की सैर को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बनाएँ। अगर तीन-चार हफ़्ते की नियमित देखभाल के बाद भी सुधार न दिखे, खून बढ़ जाए, या नया तेज़ दर्द शुरू हो, तो देर किए बिना डॉक्टर से मिलें — हर शरीर अलग होता है और सही इलाज जांच के बाद ही तय होता है।
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बवासीर एक आम, समझी-बूझी जा सकने वाली स्थिति है जिसमें घबराने की ज़रूरत नहीं। सही जानकारी, फाइबर युक्त खानपान, पर्याप्त पानी और जीवनशैली सुधार से ज़्यादातर बवासीर का इलाज बिना ऑपरेशन हो जाता है। बवासीर के लक्षण को पहचानें, समय पर ध्यान दें, और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें — जितनी जल्दी ध्यान देंगे, इलाज उतना ही आसान रहेगा।
✍️ इस लेख की समीक्षा Dr. Satish Sharma (DHMS, Reg. No. 5454-A), Senior Homeopathy Physician द्वारा की गई है। यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य से है — किसी भी उपचार से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
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लिखा और जाँचा: Dr. Satish Sharma, DHMS — वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक · प्रोफ़ाइल →
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