🌐 International Standard · TNSS + SNOT-22 + EPOS आधारित
🎬 वीडियो में देखें — यह टेस्ट कैसे काम करता है
किसके लिए है यह टेस्ट इन पर लागू होता है
किसके लिए नहीं है यह टेस्ट इन पर लागू नहीं होता
क्या आपको बार-बार छींक, नाक बंद, नाक बहना, चेहरे में भारीपन या गले में रेशा (बलगम) रहता है? ये नज़ला, साइनस या एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण हो सकते हैं। यह मुफ़्त नज़ला साइनस टेस्ट सिर्फ़ 2 मिनट में आपके लक्षणों से स्थिति की गंभीरता (हल्की / मध्यम / गंभीर) बताता है — TNSS व EPOS जैसे अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर आधारित, डॉक्टर-समीक्षित। नीचे दिए सवालों के जवाब देकर अपना Severity Score जानें।
यह टेस्ट 0 से 34 तक स्कोर देता है। नीचे हर स्तर का मतलब सीधे शब्दों में लिखा है।
आपके नाक/नज़ला के लक्षण अभी हल्के लगते हैं।
सही परहेज़, भाप (steam) और जीवनशैली सुधार से अक्सर काफ़ी आराम मिलता है। लक्षण बढ़ें तो दोबारा जाँचें।
आपके लक्षण मध्यम स्तर के लगते हैं।
नियमित देखभाल, परहेज़ और उपयुक्त होम्योपैथिक सहायता से राहत संभव है। 1–2 हफ़्ते में सुधार न हो तो डॉक्टर से मिलें।
आपके लक्षण ज़्यादा बढ़े हुए लगते हैं — कृपया योग्य चिकित्सक से सलाह ज़रूर लें।
यह स्व-आकलन है, निदान नहीं।
यह स्कोर Total Nasal Symptom Score (TNSS) से प्रेरित है, जो नाक बंद होना, छींक/खुजली और नाक बहना — इन लक्षणों को 0 से 3 के पैमाने पर आँकता है। यह उसका हिंदी रूपांतरण है, जिसका अलग से वैज्ञानिक सत्यापन नहीं हुआ है। इसलिए यह चिकित्सीय निदान नहीं, केवल एक स्व-आकलन संकेतक है।
इस टेस्ट के पीछे 3 हवाले हैं। हर एक का लिंक साथ है — आप खुद खोलकर पढ़ सकते हैं।
इनमें से 3 हवाले PubMed पर दर्ज हैं — ऊपर दिए PMID से आप उन्हें सीधे खोज सकते हैं।
नीचे सिर्फ़ वही बातें हैं जो आप ख़ुद जाँच सकते हैं।
डॉ. सतीश शर्मा (DHMS, Reg. 5454-A, 35+ वर्ष अनुभव, हिसार) के अनुसार: नज़ला और साइनस के लक्षणों को शुरू में ही सही पहचान कर इलाज शुरू करना सबसे ज़रूरी है। ज़्यादातर मामलों में एलर्जी के ट्रिगर (धूल, ठंड, धुआँ) से बचाव, भाप व सलाइन नाक धोना, और इम्यूनिटी सुधार से अच्छा नियंत्रण मिल जाता है। नज़ला साइनस टेस्ट से अपनी स्थिति की गंभीरता जानकर सही समय पर कदम उठाना फायदेमंद रहता है। गंभीर या लगातार लक्षणों (तेज़ चेहरे का दर्द, खूनी बलगम, सूँघने की शक्ति का जाना) में डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है।
Dr. Satish Sharma, DHMS · Reg. No. 5454-A
Council of Homoeopathic System of Medicine, Haryana (Dept. of Ayush, Govt. of Haryana)
नवीनीकरण: 31 दिसंबर 2026 तक
इस पेज की समीक्षा और तथ्य-जाँच — दोनों Dr. Satish Sharma, DHMS ने की हैं।
यह पेज किन नियमों से बनता और जाँचा जाता है, वह पूरी नीति में लिखा है।
इस टेस्ट से जुड़े 24 सवाल — जवाब देखने के लिए सवाल पर टैप करें।
नज़ला (एलर्जिक राइनाइटिस) नाक की एलर्जी है — धूल, पॉलन, ठंड से छींक, बहती नाक, खुजली होती है। साइनस (साइनसाइटिस) नाक के आसपास की हड्डियों की खाली जगहों (sinus cavities) की सूजन है, जिसमें चेहरे/माथे में दर्द-दबाव व गाढ़ा बलगम होता है। आसान पहचान — नज़ला = एलर्जी, छींक-बहना-खुजली मुख्य; साइनस = सूजन, चेहरे का दर्द व गाढ़ा बलगम मुख्य। दोनों अक्सर साथ भी होते हैं — पुराना नज़ला ठीक से इलाज न हो तो साइनस में बदल सकता है। सही पहचान के लिए लक्षणों की अवधि (कितने दिन/हफ़्ते) और प्रकार देखना ज़रूरी है, और ज़रूरत पर ENT डॉक्टर की जाँच।
नज़ला (एलर्जिक राइनाइटिस) भारत में बहुत आम है। एक बड़े भारतीय अध्ययन में नाक के लक्षणों वाले मरीज़ों में से लगभग 53.7% में एलर्जिक राइनाइटिस पाया गया। छींक सबसे आम लक्षण है। SFAR भारतीय अध्ययन (40,001 मरीज़, 19 राज्य) के अनुसार धूल के कण (House Dust Mite) सबसे बड़ा कारण हैं — लगभग 73.8% मरीज़ों में। छींक 69% लोगों में, और एलर्जिक राइनाइटिस वाले मरीज़ों में लगभग 87% में पाई गई। अक्टूबर से जनवरी के महीनों में नज़ला सबसे ज़्यादा बढ़ता है। यानी नज़ला में शर्माने की कोई बात नहीं — यह आम व इलाज-योग्य है।
बार-बार नज़ला मुख्यतः एलर्जी (धूल, पॉलन, ठंड, धुआँ, पालतू जानवर), कमज़ोर इम्यूनिटी, मौसम बदलाव और प्रदूषण से होता है। जिनके परिवार में एलर्जी/दमा का इतिहास हो, उनमें जोखिम ज़्यादा रहता है। नज़ला असल में इम्यून सिस्टम की अति-प्रतिक्रिया है — शरीर हानिरहित चीज़ों (धूल/पॉलन) को 'दुश्मन' समझकर छींक-बहना शुरू कर देता है। उत्तर भारत में सर्दियों (अक्टूबर–जनवरी) और स्टबल-बर्निंग के मौसम में हवा का प्रदूषण (PM2.5) बढ़ने से नज़ला तेज़ होता है। इसलिए सिर्फ़ लक्षण दबाने के बजाय ट्रिगर से बचाव + इम्यूनिटी सुधार दोनों ज़रूरी हैं।
साइनसाइटिस मुख्यतः समय के आधार पर बँटता है — Acute (नया, 4 हफ़्ते से कम, अक्सर सर्दी-जुकाम के बाद), Subacute (4–12 हफ़्ते), और Chronic (पुराना, 12 हफ़्ते या ज़्यादा)। Recurrent में बार-बार लौटता है। अंतरराष्ट्रीय EPOS 2020 दिशानिर्देश के अनुसार 12 हफ़्ते की सीमा सबसे अहम है — इससे ज़्यादा चले तो 'क्रोनिक राइनोसाइनुसाइटिस (CRS)' कहलाता है। नया (Acute) साइनस आमतौर पर 2–3 हफ़्ते में अपने आप या सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है, जबकि पुराना सालों चल सकता है और इसमें ज़्यादा ध्यान व सही इलाज ज़रूरी है। कुछ पुराने मामलों में नाक में मस्से (नाक की गाँठ (polyp)) भी बन सकते हैं।
नाक बंद के लिए सबसे असरदार व सुरक्षित घरेलू उपाय हैं — गुनगुने पानी से भाप (steam), सलाइन नेज़ल इरिगेशन (Jal Neti/नमक-पानी से नाक धोना), भरपूर पानी, और एलर्जी ट्रिगर (धूल/ठंड) से बचाव। गंभीर/पुराने मामलों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी। सलाइन नाक धोना (नमक-पानी) एक सस्ता, कम-जोखिम वाला तरीका है जो बलगम पतला कर नाक खोलता है — शोध में पुराने व बार-बार होने वाले साइनस में इसका लाभ देखा गया है, और ज़्यादातर लोग इसे महीनों तक इस्तेमाल करते रहे। ध्यान दें — नाक की डिकंजेस्टेंट स्प्रे लगातार 3–5 दिन से ज़्यादा न इस्तेमाल करें (इससे उल्टा नाक और बंद हो सकती है)। पुराने नज़ला/साइनस में जड़ कारण (एलर्जी) का इलाज ज़रूरी है।
हाँ, ज़्यादातर साइनस बिना ऑपरेशन ठीक हो जाता है। नया (Acute) साइनस अक्सर 2–3 हफ़्ते में सामान्य इलाज, भाप, सलाइन व आराम से ठीक हो जाता है। सर्जरी सिर्फ़ बहुत पुराने, गंभीर या नाक की गाँठ (polyp) वाले मामलों में, जाँच के बाद ही सोची जाती है। अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार पुराने साइनस का पहला इलाज भी दवा-आधारित (intranasal steroids, सलाइन इरिगेशन) होता है, सर्जरी नहीं। सर्जरी तभी जब दवा से आराम न मिले या रुकावट (पॉलिप/संरचना) हो। होम्योपैथी, आयुर्वेद व एलोपैथी तीनों में बिना-सर्जरी विकल्प मौजूद हैं। सही इलाज आपकी स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं।
हाँ, साइनस सिरदर्द का आम कारण है। जब साइनस कैविटी में सूजन व बलगम भर जाता है, तो दबाव बनता है — जिससे माथे, आँखों के बीच और गालों में दर्द होता है। झुकने या सिर नीचे करने पर यह दर्द बढ़ जाता है। यह साइनस का एक खास संकेत है — सामान्य सिरदर्द से अलग, इसमें चेहरे पर दबाव/भारीपन भी रहता है, अक्सर सुबह ज़्यादा। बलगम निकलने पर राहत मिलती है। पर ध्यान दें — हर सिरदर्द साइनस का नहीं होता; अगर सिरदर्द बहुत तेज़, अचानक, या बुखार-गर्दन-अकड़न के साथ हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
पोस्ट-नेज़ल ड्रिप (PND) यानी नाक का बलगम गले के पीछे टपकना। इससे गला खराब, बार-बार खंखारना, खाँसी (खासकर रात में), और गले में चिपचिपाहट महसूस होती है। यह नज़ला, साइनस व एलर्जी का आम लक्षण है। PND तब होता है जब नाक/साइनस ज़्यादा या गाढ़ा बलगम बनाते हैं जो आगे से न निकलकर पीछे गले में जाता है। भरपूर पानी, भाप, सलाइन नाक धोना और एलर्जी ट्रिगर से बचाव इसमें मदद करते हैं। अगर बलगम पीला/हरा, बदबूदार, या लंबे समय तक हो तो संक्रमण हो सकता है — डॉक्टर से जाँच कराएँ।
नाक की गाँठ (polyp) नाक/साइनस की परत पर बनने वाली मुलायम, बिना-दर्द वाली (benign/गैर-कैंसर) सूजन हैं। इनसे नाक लगातार बंद रहती है, सूँघने की शक्ति कम होती है, और मुँह से साँस लेनी पड़ती है। ये अक्सर पुराने साइनस/एलर्जी से जुड़े होते हैं। शोध के अनुसार लगभग 20% पुराने राइनोसाइनुसाइटिस मरीज़ों में पॉलिप पाए जाते हैं, और इनके साथ नाक बंद होना 95% तक आम है। शुरुआती छोटे पॉलिप दवा से नियंत्रित हो सकते हैं, पर बड़े/जिद्दी पॉलिप में ENT जाँच (endoscopy) व कभी सर्जरी ज़रूरी हो सकती है। बच्चों में पॉलिप कम आम हैं और इनमें डॉक्टर अन्य बीमारियों की भी जाँच करते हैं। सूँघने की शक्ति बहुत कम हो + नाक हमेशा बंद हो तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ।
फायदेमंद — गुनगुना पानी, अदरक-तुलसी-शहद, हल्दी, हरी सब्ज़ियाँ, विटामिन-C वाले फल, ओमेगा-3 (अलसी/अखरोट), लहसुन। परहेज़ — ठंडी/बासी चीज़ें, ज़्यादा डेयरी (कुछ लोगों में बलगम बढ़ाती है), तला-भुना, अत्यधिक मीठा, और ज्ञात एलर्जी वाली चीज़ें। खानपान का असर हर व्यक्ति में अलग होता है — जो चीज़ आपका बलगम/छींक बढ़ाए, उसी से बचें। धूल, धुआँ, तेज़ गंध, ठंडी हवा से बचाव भी उतना ही ज़रूरी है जितना खानपान। गुनगुना पानी व भाप बलगम पतला रखते हैं। संतुलित आहार व अच्छी इम्यूनिटी नज़ला को बार-बार होने से रोकने में मदद करती है।
भाप (steam) और जल नेति/सलाइन नाक धोना नज़ला-साइनस के सबसे आसान, सस्ते व असरदार घरेलू उपाय हैं। भाप बलगम पतला कर बंद नाक खोलती है; जल नेति नाक से धूल, एलर्जन व गाढ़ा बलगम धोकर निकालती है। शोध में सलाइन नाक धोने से पुराने व बार-बार होने वाले साइनस में लक्षणों में राहत देखी गई, और लोग इसे महीनों तक अपनाते रहे क्योंकि यह सुरक्षित है। ध्यान दें — जल नेति के लिए हमेशा साफ़/उबला ठंडा किया पानी + सही नमक इस्तेमाल करें, और शुरुआत किसी जानकार की देखरेख में करें। दिन में 1–2 बार करना पर्याप्त है।
तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ अगर — तेज़ बुखार के साथ चेहरे/आँख के आसपास सूजन-लालिमा हो, आँख से दिखने में दिक्कत/आँख बाहर निकलती लगे, बहुत तेज़ सिरदर्द-गर्दन अकड़न-भ्रम हो, लक्षण 10 दिन से ज़्यादा बिगड़ते रहें, या बार-बार खून आए। ये चेतावनी संकेत इसलिए ज़रूरी हैं क्योंकि कभी-कभी साइनस संक्रमण आँख या दिमाग के आसपास के ऊतकों तक फैल सकता है — हालाँकि यह दुर्लभ है, पर गंभीर है। दिशानिर्देशों के अनुसार जब दवा से आराम न मिले या ऐसे red-flag लक्षण हों तो ENT विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। एक तरफ की लगातार नाक बंद, खूनी बलगम, या सूँघने की शक्ति का अचानक पूरा जाना भी जाँच का संकेत है।
हाँ, अनुपचारित पुराना नज़ला (एलर्जिक राइनाइटिस) और दमा अक्सर जुड़े होते हैं — इसे 'One Airway' अवधारणा कहते हैं। नज़ला को नज़रअंदाज़ करने पर एलर्जिक सूजन फेफड़ों तक बढ़ सकती है। भारतीय व अंतरराष्ट्रीय (ARIA-WHO) आँकड़ों के अनुसार दमा वाले लगभग 65–80% भारतीय मरीज़ों में एलर्जिक राइनाइटिस भी साथ पाया जाता है। यही कारण है कि नज़ला का समय पर सही इलाज ज़रूरी है — सिर्फ़ छींक-बहना दबाने के बजाय जड़ (एलर्जी/इम्यूनिटी) पर काम करना। अगर नज़ला के साथ साँस फूलना, सीने में जकड़न या लगातार खाँसी हो तो डॉक्टर से दमा की जाँच कराएँ।
बच्चों में नज़ला आम है — बार-बार छींक, बहती/बंद नाक, रात की खाँसी। सबसे ज़रूरी है ट्रिगर से बचाव (धूल, ठंड, धुआँ), भरपूर पानी, हल्की भाप, और साफ़-सुथरा माहौल। कोई भी दवा बच्चे को डॉक्टर की सलाह से व कम मात्रा में ही दें। बच्चों की नाज़ुक प्रतिरोधक क्षमता के कारण उनमें लक्षण जल्दी आते हैं। घर में धूल कम रखें, तकिया-चादर धूप में सुखाएँ, और पालतू जानवर/धुएँ से दूर रखें। अगर बच्चे को बार-बार कान दर्द, लगातार नाक बंद, सूँघने में कमी, या साँस की दिक्कत हो तो बाल/ENT डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ — बच्चों में नाक के पॉलिप दुर्लभ होते हैं और इनकी अलग जाँच ज़रूरी होती है।
होम्योपैथी 'समान से समान का उपचार' सिद्धांत पर काम करती है — यह शरीर की इम्यूनिटी को संतुलित कर एलर्जी की अति-प्रतिक्रिया कम करने में सहायक मानी जाती है, ताकि सिर्फ़ लक्षण न दबें बल्कि बार-बार होना भी कम हो। नज़ला/साइनस में Arsenicum Album, Kali Bichromicum, Pulsatilla, Mercurius जैसी दवाएं पारंपरिक रूप से लक्षण-अनुसार दी जाती हैं। ईमानदारी से — किसी भी पद्धति में 'पक्का इलाज' का दावा सही नहीं; परिणाम स्थिति की पुरानीयत व नियमितता पर निर्भर करते हैं और व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न होते हैं। होम्योपैथिक दवा हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह से, सही खुराक व परहेज़ के साथ लें। 🌿 Specialist Combo Pack — Nazla Killer Drops BC5: नज़ला, साइनस, छींक व बलगम के लिए डॉक्टर-समीक्षित होम्योपैथिक कॉम्बो। पूरी जानकारी व ऑर्डर: https://teqtis.store/products/nazla-killer-drops-bc5 · Expert Call: 70422-47248, 98963-99083
नया (Acute) नज़ला/साइनस आमतौर पर 1–3 हफ़्ते में आराम व सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है। पुराना (Chronic, 12 हफ़्ते+) या एलर्जिक मामला ज़्यादा समय लेता है — इसमें नियमित इलाज, परहेज़ व धैर्य ज़रूरी है। समय इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी पुरानी है, कौन-से ट्रिगर हैं, और इलाज कितना नियमित है। हल्के मामलों में कुछ दिनों–हफ़्तों में फ़र्क़ दिखता है; पुराने/एलर्जिक मामलों में 2–3 महीने का धैर्य लग सकता है। बीच में आराम लगने पर इलाज अधूरा न छोड़ें — इससे समस्या लौट सकती है। लगातार सुधार न दिखे तो डॉक्टर से दोबारा सलाह लें।
एलर्जिक नज़ला संक्रामक नहीं है — यह एलर्जी की प्रतिक्रिया है, छूने/पास रहने से नहीं फैलती। पर अगर नज़ला/साइनस किसी वायरस (सर्दी-जुकाम) से शुरू हुआ है, तो वो शुरुआती वायरल संक्रमण दूसरों में फैल सकता है। यानी फ़र्क़ कारण का है — एलर्जी वाला हिस्सा संक्रामक नहीं, पर वायरल सर्दी-जुकाम (जो आगे साइनस बन सकता है) फैल सकता है। इसलिए खाँसते-छींकते समय रुमाल/कोहनी का इस्तेमाल करें और हाथ धोएँ। बैक्टीरियल साइनस संक्रमण भी आमतौर पर सीधे एक से दूसरे में नहीं फैलता।
यह एक मुफ़्त ऑनलाइन सेल्फ-टेस्ट है जिसमें आप अपने लक्षणों (नाक बंद, छींक, बहना, बलगम, चेहरे का दर्द, सूँघना आदि) के सवालों के जवाब देते हैं। 2 मिनट में यह 34-में से एक स्कोर देकर बताता है कि स्थिति हल्की, मध्यम या गंभीर लगती है। यह टेस्ट डॉक्टरों के माने हुए अंतरराष्ट्रीय पैमानों — TNSS (Total Nasal Symptom Score), SNOT-22 और EPOS 2020 — पर आधारित है, और एलर्जिक राइनाइटिस, साइनसाइटिस, नाक की गाँठ (polyp) व PND जैसी संभावित स्थितियों का संकेत भी देता है। ध्यान दें — यह जागरूकता का उपकरण है, डॉक्टर की जाँच या निदान का विकल्प नहीं। पक्की पहचान डॉक्टर की जाँच से ही होती है।
हवा का प्रदूषण नज़ला-साइनस का बड़ा कारण है। PM2.5 जैसे महीन कण नाक की परत को परेशान करते हैं, सूजन व एलर्जी बढ़ाते हैं। उत्तर भारत में सर्दियों व पराली जलने (stubble-burning) के मौसम में जब PM2.5 बहुत बढ़ जाता है, तब नज़ले के मरीज़ बढ़ जाते हैं। प्रदूषण वाले दिनों में बाहर मास्क पहनें, घर की हवा साफ़ रखें (ज़रूरत पर HEPA), और भीड़/धुएँ वाली जगहों से बचें। नाक धोना (सलाइन) दिनभर जमा हुए कण-एलर्जन निकालने में मदद करता है। संवेदनशील लोग प्रदूषण-चरम वाले समय में बाहरी गतिविधि कम करें।
नज़ला, साइनस, एलर्जी, नाक की गाँठ (polyp) या गले में रेशा (PND) से जुड़ी सलाह के लिए आप Teqtis India (हिसार) से संपर्क कर सकते हैं — कॉल करें 70422-47248 या 98963-99083, या WhatsApp 8278598205 पर संदेश भेजें। यह सलाह डॉक्टर की जाँच की जगह नहीं है। Teqtis India के ब्रांड चिकित्सक डॉ. सतीश शर्मा (DHMS, Reg. 5454-A) को होम्योपैथी में 35+ वर्षों का अनुभव है। आप फ़ोन/WhatsApp पर अपनी स्थिति बता सकते हैं और सामान्य मार्गदर्शन ले सकते हैं। गंभीर लक्षण (तेज़ बुखार, आँख/चेहरे की सूजन, बहुत तेज़ सिरदर्द) हों तो सबसे पहले नज़दीकी डॉक्टर/अस्पताल ज़रूर जाएँ।
Nazla Killer Drops BC5 एक डॉक्टर-समीक्षित होम्योपैथिक Specialist Combo Pack है, जो नज़ला, साइनस, बार-बार छींक, नाक बंद, बलगम (PND) व एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षणों में सहायक माना जाता है। इसमें Drops + BC5 Tissue Salts दोनों मिलते हैं — एक साथ लक्षणों में राहत व इम्यूनिटी सहयोग के लिए। Nazla Killer Drops में 8 होम्योपैथिक घटक (3X) हैं। कोष्ठक में वे लक्षण दिए हैं जिनमें ये पारंपरिक रूप से दिए जाते हैं — Arsenicum Album (पानी जैसा बहना, छींकें), Calcarea Carbonica (बार-बार जुकाम), Kali Bichromicum (गाढ़ा बलगम, माथे में भारीपन), Mercurius Solubilis व Mercurius Sulph. Ruber (साइनस की सूजन, माथे का दर्द), Pulsatilla (बच्चों का नज़ला, सूँघने की कमी), Sepia (पुरानी एलर्जी के लक्षण), Sulphur (बार-बार लौटने वाले लक्षण)। BC5 Tissue Salts में 4 Schussler salts (3X) हैं — Ferrum Phos (शुरुआती जुकाम), Kali Mur (सफ़ेद बलगम, बंद नाक), Kali Sulph (पीला-हरा बलगम), Natrum Mur (पानी जैसा बहना)। निर्माता — M. Bhattacharyya & Co. (Since 1889), Kolkata · AYUSH+GMP। पूरी जानकारी व ऑर्डर: https://teqtis.store/products/nazla-killer-drops-bc5
💧 खुराक उम्र और लक्षणों के अनुसार तय होती है, इसलिए इसे योग्य चिकित्सक की सलाह से ही लें — ख़ासकर बच्चों, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं, और पहले से कोई बीमारी या दवा लेने वालों के लिए। दवा से 30 मिनट पहले/बाद सिर्फ़ पानी लें। ⚠️ परहेज़: कच्चा प्याज़, लहसुन, कॉफी, हींग, Mint, Camphor व तेज़ गंध से बचें (ये होम्योपैथिक दवा का असर कम कर सकते हैं)। कोर्स कितना लंबा चलेगा, यह लक्षणों और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है। नियमित परहेज़ ज़रूरी है। किसी भी दवा को योग्य चिकित्सक की सलाह से लें।
एक महीने का पैक: ₹1,085 (शिपिंग सहित)। तीन महीने का पैक (पुराने/Chronic मामलों के लिए): ₹3,255 (शिपिंग सहित)। यह All India डिलीवरी के साथ ऑनलाइन उपलब्ध है — ऑर्डर करें: https://teqtis.store/products/nazla-killer-drops-bc5 निर्माता (MFG): M. Bhattacharyya & Co. (Since 1889), Kolkata — AYUSH+GMP प्रमाणित। ब्रांड चिकित्सक: डॉ. सतीश शर्मा (DHMS, Reg. 5454-A, 35+ वर्ष, हिसार)। किसी भी सवाल या ऑर्डर सहायता के लिए — Expert Call: 70422-47248, 98963-99083 या WhatsApp: 8278598205 पर संपर्क करें।
Nazla Killer BC5 को नज़ला, साइनस व एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षणों के लिए एक भरोसेमंद होम्योपैथिक विकल्प के रूप में चुना जाता है, क्योंकि इसमें Drops (लक्षणों में राहत) + BC5 Tissue Salts (बलगम निकासी व शुरुआती अवस्था सहयोग) दोनों एक साथ मिलते हैं, और यह डॉक्टर-समीक्षित व 1889 से स्थापित निर्माता का उत्पाद है। ईमानदारी से — होम्योपैथी में परिणाम हर व्यक्ति में अलग होते हैं और स्थिति की पुरानीयत पर निर्भर करते हैं; किसी भी पद्धति में 'पक्का इलाज' का दावा सही नहीं। अच्छे परिणाम के लिए नियमित सेवन, परहेज़ व पूरा कोर्स ज़रूरी है। अपनी स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन के लिए Expert Call: 70422-47248, 98963-99083 या WhatsApp 8278598205 पर हमारी टीम/डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।
नीचे दिए लक्षणों में स्कोर देखने में समय न लगाएँ।
यह टूल किसी बीमारी का निदान नहीं करता। आपात स्थिति में नज़दीकी अस्पताल जाएँ।
चिकित्सक-समीक्षित · शोध-आधारित मार्गदर्शिका
नज़ला साइनस टेस्ट — यह एक Free Online Severity Calculator है जो नाक की एलर्जी, पुराने नज़ले, साइनस और PND इलाज (गले में रेशा गिरना) की गंभीरता सिर्फ़ 2 मिनट में आँकता है। नज़ला साइनस टेस्ट में TNSS, SNOT-22 (Sino-Nasal Outcome Test) और EPOS 2020 (International Sinusitis Standard) — तीनों Tools मिलाकर 34-Point Composite Score देते हैं।
Dr. Satish Sharma DHMS (Reg. 5454-A, 35+ वर्ष, Hisar, Haryana) द्वारा Medically Reviewed। SFAR India Study (40,001 Patients) और ARIA-WHO 2022 पर आधारित।
यह टेस्ट एलर्जिक राइनाइटिस (नज़ला) व साइनसाइटिस — Allergic Rhinitis & Sinusitis से जुड़े लक्षणों को आँकता है। भारत में यह स्थिति आम है — 19 राज्यों के एक बड़े अध्ययन में नाक के लक्षण लेकर आए मरीज़ों में से 53.7% में एलर्जिक राइनाइटिस मिला (SFAR India Study, J Asthma Allergy 2025; PMID 40933189)।
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नज़ला (Allergic Rhinitis) एक Chronic बीमारी है जो अनुपचारित रहने पर Sinusitis, Nasal Polyp और Asthma में बदल जाती है। ARIA-WHO के अनुसार एलर्जिक राइनाइटिस और अस्थमा अक्सर साथ-साथ होते हैं (भारतीय अस्थमा रोगियों में नज़ला 65–80% तक देखा गया है)। बार-बार छींकें आना, नाक बंद होना, गले में रेशा गिरना (PND) — ये सब मिलकर नींद, Productivity और Quality of Life खराब करते हैं।
यह नज़ला साइनस टेस्ट (Sinus Calculator Hindi) आपको 5 Categories में Assessment देता है — Age, Duration, Triggers, Symptoms और Daily Impact। हर Category के आधार पर Score Calculate होता है और आपको Personalized Result मिलता है।
होम्योपैथी 'समान से समान का उपचार' सिद्धांत पर इम्यूनिटी को संतुलित करके नज़ला/एलर्जी के लक्षणों में सहायक मानी जाती है (पारंपरिक उपयोग; व्यक्तिगत परिणाम भिन्न हो सकते हैं)। यह सिर्फ़ Symptom Block करने के बजाय लक्षणों की जड़ (एलर्जी/इम्यून प्रतिक्रिया) को संबोधित करने में सहायक माना जाता है।
Nazla Killer BC5 — Drops और BC5 Tissue Salts का एक होम्योपैथिक संयोजन है, जो नज़ले और साइनस के लक्षणों में सहायक माना जाता है (पारंपरिक उपयोग; व्यक्तिगत परिणाम भिन्न हो सकते हैं)। 8 होम्योपैथिक घटक (Arsenicum Album, Calcarea Carb, Kali Bichromicum, Mercurius Solubilis, Pulsatilla, Sepia, Sulphur, Mercurius Sulph Ruber) + 4 BC5 Tissue Salts (Ferrum Phos, Kali Mur, Kali Sulph, Natrum Mur) — इस तरह इसमें कुल 12 घटक शामिल हैं।
नाक बंद होने का कारण समझना ज़रूरी है — House Dust Mite (73.8%, SFAR India Study; PMID 40933189), Pollen (सरसों Feb–Mar, गेहूँ Mar–Apr), Mold Spores (मानसून में), Air Pollution (पराली Oct–Nov, PM2.5 300–400 µg/m³), AC की ठंडी हवा — ये सब Nasal Mucosa को Inflame करते हैं ये नाक बंद होने का कारण है। इस नज़ला साइनस टेस्ट में इन्हीं Triggers के आधार पर Score Calculate होता है।
नाक की एलर्जी के Practical Solutions: हर 2 हफ़्ते में Pillow Cover बदलें, Mattress धूप में सुखाएँ, HEPA Filter Air Purifier रखें, Steam Inhalation 2x Daily, Jal Neti सुबह खाली पेट, और Anulom Vilom 10 मिनट। Vitamin C (आँवला), Zinc और Omega-3 से Natural Immunity Build करें।
नाक की एलर्जी अनुपचारित रहने पर Post Nasal Drip (PND) में बदल जाती है। PND इलाज में Root Cause (Sinusitis/Allergy) ठीक करना ज़रूरी है। पुरानी खाँसी के सबसे आम कारणों में Post Nasal Drip (PND) एक है। PND में Symptoms हैं — गले में रेशा गिरना, रात में खाँसी, सुबह Throat Clearing, आवाज़ बैठना।
PND इलाज के लिए: गर्म नमक-पानी के गरारे 3x Daily, Steam Inhalation, सोते समय सिर 30–45° ऊँचा (Wedge Pillow), Dairy रात में कम करें। Nazla Killer BC5 में Kali Bichromicum 3X और Sepia 3X शामिल हैं, जो पारंपरिक रूप से गाढ़े बलगम और पुराने PND के लक्षणों में दिए जाते हैं (व्यक्तिगत परिणाम भिन्न हो सकते हैं)।
बार-बार छींकें आना Allergic Rhinitis का Most Classic Sign है। SFAR India Study: 86.8% AR Patients में Sneezing Reported था। सुबह उठते ही बार-बार छींकें आना House Dust Mite Allergy का Direct Sign है — रात में 8 घंटे Mite Exposure से IgE Response सुबह Peak पर होती है।
बार-बार छींकें रोकने के लिए: Bedroom में Dust Mite कम करें, AC Filter 15 दिन में साफ़ करें, Temperature Shock avoid करें (बाहर 45°C से 18°C AC में अचानक न जाएँ)। Nazla Killer BC5 में Arsenicum Album 3X शामिल है, जो पारंपरिक रूप से छींक और पानी जैसा नाक बहने के लक्षणों में दिया जाता है (व्यक्तिगत परिणाम भिन्न हो सकते हैं)।
यह sinus calculator hindi में 5 Steps में काम करता है — Step 1: Age Category Select करें · Step 2: Symptoms की Duration बताएँ · Step 3: अपने Triggers Identify करें · Step 4: Current Symptoms Mark करें · Step 5: Daily Life पर Impact बताएँ। Submit करने पर 34-Point Score Calculate होता है और आपको Severity Category मिलती है।
नज़ला और साइनस के लक्षण अक्सर आपस में मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए लोग दोनों को एक ही समझ लेते हैं। नीचे वे लक्षण दिए गए हैं जिन्हें यह नज़ला साइनस टेस्ट आँकता है — इन्हीं के आधार पर आपका स्कोर बनता है।
ये लक्षण अगर चार हफ़्ते से ज़्यादा बने रहें, या बार-बार लौट आएँ, तो इसे लंबा चलने वाला मामला माना जाता है और योग्य चिकित्सक से जाँच करानी चाहिए।
बचाव का सबसे बड़ा हिस्सा उन चीज़ों से दूरी है जो लक्षण भड़काती हैं। नीचे दी आदतें रोज़मर्रा की हैं और इनका कोई नुक़सान नहीं।
इनसे आराम न मिले या लक्षण बार-बार लौटें, तो अपने आप दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
ये तीनों नाम अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल हो जाते हैं। पर इनका मतलब अलग है। नीचे आसान भाषा में फ़र्क़ दिया है।
नज़ला आम बोलचाल का शब्द है। इसमें नाक बहना, बंद होना और छींकें आना शामिल है। यह मौसमी भी हो सकता है और लंबा भी चल सकता है।
साइनसाइटिस में चेहरे की हड्डियों के अंदर बनी खोखली जगहों (साइनस) की परत में सूजन आ जाती है। इसमें माथे या गाल पर भारीपन रहता है। झुकने पर दबाव बढ़ता है। चार हफ़्ते से ज़्यादा चले तो उसे लंबा चलने वाला साइनसाइटिस कहते हैं।
यह एलर्जी से होने वाली नाक की सूजन है। धूल, ठंडी हवा या धुएँ के संपर्क में लक्षण भड़कते हैं। सुबह के समय छींकों का दौर इसकी आम पहचान है।
| बात | नज़ला | एलर्जिक राइनाइटिस | साइनसाइटिस |
|---|---|---|---|
| मुख्य लक्षण | नाक बहना, बंद होना | छींकें, खुजली, नाक बहना | चेहरे पर दबाव, भारीपन |
| ट्रिगर | मौसम बदलना | धूल, ठंड, धुआँ | अक्सर लंबे नज़ले के बाद |
| कितना चलता है | कुछ दिन | ट्रिगर रहने तक | हफ़्तों तक |
| बुख़ार | कभी-कभी | आमतौर पर नहीं | हो सकता है |
इन तीन नामों का मतलब नीचे दिया है। आपको इन्हें याद रखने की ज़रूरत नहीं। यह सिर्फ़ यह समझने के लिए है कि सवाल कहाँ से आए हैं।
यह नज़ला साइनस टेस्ट Teqtis Health का बनाया हुआ है। इसे भरने में दो मिनट लगते हैं।
स्कोर एक संकेत है, फ़ैसला नहीं। दो लोगों का एक ही स्कोर हो सकता है और वजह अलग निकल सकती है।
मान लीजिए आपको हर सुबह छींकें आती हैं। दिन चढ़ते ही आराम मिल जाता है। सर्दियों में यह बढ़ जाता है। आप इसे "बस मौसमी नज़ला" मानकर छोड़ देते हैं।
अब इसमें एक बात जुड़ जाती है — माथे पर भारीपन, और झुकने पर दबाव। यह वही मोड़ है जहाँ बात सिर्फ़ नज़ले की नहीं रहती। इसी फ़र्क़ को पकड़ने के लिए यह टेस्ट चेहरे के दर्द और सूँघने की शक्ति वाले सवाल पूछता है।
यह कोई असली मरीज़ का मामला नहीं है। यह सिर्फ़ यह दिखाने के लिए है कि लक्षण कैसे बदलते हैं।
यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है। साइनस का होम्योपैथिक इलाज कई लोगों को राहत देता है, ख़ासकर जब लक्षण बार-बार लौटते हों और एलर्जी बड़ी वजह हो। साइनस बिना ऑपरेशन भी बेहतर हो सकता है, और ज़्यादातर मामलों में पहली कोशिश यही होती है।
पर हर मामला ऐसा नहीं होता। कुछ हालात में जाँच और आधुनिक इलाज ही सही रास्ता है:
भारत में नाक के लक्षण लेकर आए मरीज़ों के एक बड़े अध्ययन में House Dust Mite सबसे आम एलर्जी-कारक मिला (PubMed — PMID 40933189)। House Dust Mite नंगी आँख से नहीं दिखते। ये बिस्तर, तकिए और परदों में रहते हैं।
इसीलिए बचाव की सलाह में चादर गरम पानी में धोना और गीले कपड़े से सफ़ाई सबसे ऊपर आती है। यह छोटी आदत आपकी छींकों की तादाद पर सीधा असर डालती है।
ज़्यादातर लोगों में साइनस बिना ऑपरेशन नियंत्रण में आ जाता है। परहेज़, भाप, नाक धोना और सही इलाज — इन्हीं से शुरुआत होती है। साइनस बिना ऑपरेशन बेहतर हो सकता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रुकावट की वजह क्या है।
लंबे साइनसाइटिस की पहचान लक्षणों की अवधि और तरह, दोनों से होती है — इसी पर अंतरराष्ट्रीय मानदंड बने हैं (PubMed — PMID 16826087)। अगर वजह बड़ा Nasal Polyp या हड्डी की बनावट है, तो दवा अकेले काफ़ी नहीं पड़ती। यह फ़ैसला जाँच के बाद ही होता है, स्कोर देखकर नहीं।
इन हालात में ENT की जाँच, endoscopy या CT ज़रूरी हो सकती है। सही रास्ता चुनने के लिए पहले वजह पता होनी चाहिए — यही इस टेस्ट का मक़सद है। विस्तार से पढ़ने के लिए नज़ला साइनस का इलाज कैसे करें — पूरी गाइड देखें।
नाक, एलर्जी और साइनस से जुड़े बाक़ी लेख Teqtis Health पर पढ़े जा सकते हैं।
नज़ला, एलर्जिक राइनाइटिस और साइनसाइटिस अलग-अलग चीज़ें हैं, पर इनके लक्षण आपस में मिल जाते हैं। यही वजह है कि लोग सालों तक "बस नज़ला है" कहकर टालते रहते हैं।
यह टेस्ट आपको एक साफ़ शुरुआत देता है। आपके लक्षण एक स्कोर बनते हैं, और वह स्कोर बताता है कि बात हल्की है या ध्यान माँग रही है। साइनस का होम्योपैथिक इलाज हो या ENT की जाँच — दोनों में पहला क़दम एक ही है: अपनी स्थिति ठीक से समझना।
तीन बातें याद रखें। पहली, यह स्कोर निदान नहीं है। दूसरी, चेतावनी लक्षणों में देर न करें। तीसरी, किसी भी दवा या इलाज का फ़ैसला योग्य चिकित्सक ही करेंगे।
Teqtis Health पर हर मेडिकल पन्ना योग्य चिकित्सक की समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होता है।
डॉ. सतीश शर्मा (DHMS, Reg. 5454-A, 35+ वर्ष अनुभव, हिसार) के अनुसार: नज़ला और साइनस के लक्षणों को शुरू में ही सही पहचान कर इलाज शुरू करना सबसे ज़रूरी है। ज़्यादातर मामलों में एलर्जी के ट्रिगर (धूल, ठंड, धुआँ) से बचाव, भाप व सलाइन नाक धोना, और इम्यूनिटी सुधार से अच्छा नियंत्रण मिल जाता है। नज़ला साइनस टेस्ट से अपनी स्थिति की गंभीरता जानकर सही समय पर कदम उठाना फायदेमंद रहता है। गंभीर या लगातार लक्षणों (तेज़ चेहरे का दर्द, खूनी बलगम, सूँघने की शक्ति का जाना) में डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है।
Expert Call: 📞 70422-47248 | 98963-99083 · WhatsApp: 8278598205 · Order: teqtis.store/products/nazla-killer-drops-bc5
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लिखा और जाँचा: Dr. Satish Sharma, DHMS — वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक · प्रोफ़ाइल →
अनुभव: 35+ वर्ष का समृद्ध क्लिनिकल अनुभव
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